यों तो रोज़ आती है शाम
पर अक्सर बहुत कुछ दे जाती है एक शाम
चंचल आँखों की ख्वाहिशें
हंसते चेहरे की ख़ुशी
मीठे स्पर्श का आनंद
खनकती आवाज़ का माधुर्य
कितनी अनमोल है एक शाम.....
अंकुरवाणी
Sunday, 28 February 2016
एक शाम
Friday, 22 January 2016
चाँद आँहें भरेगा
चाँद आँहें
भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
ऐसा चेहरा है तेरा जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है उस जगह है अँधेरा
कैसे फिर चैन तुझ बिन तेरे बदनाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
आँख नाजुक सी कलियाँ बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल जुल्फें जन्नत की गलियाँ
तेरी खातिर फ़रिश्ते सर पे इलज़ाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
चाँद आँहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे।
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
ऐसा चेहरा है तेरा जैसे रोशन सवेरा
जिस जगह तू नहीं है उस जगह है अँधेरा
कैसे फिर चैन तुझ बिन तेरे बदनाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
आँख नाजुक सी कलियाँ बात मिसरी की डालियाँ
होंठ गंगा के साहिल जुल्फें जन्नत की गलियाँ
तेरी खातिर फ़रिश्ते सर पे इलज़ाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे
चाँद आँहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे।
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